“भ्रूण हत्या “

“मै हूँ आपकी नन्ही बिटियाँ
इस धरा पे मुझे भी आने दो
माँ की गोंद,पिता का प्यार
बरबश मुझे भी पाने दो

चहकेंगी खुशियां आँगन में
सदा मेरी किलकारियों से
बिखेरके चंचलता मै अपनी
भर दूंगी घर को खुशियों से

दे दो जीने का अधिकार मुझे भी
मत मुझको पेट में तुम मारो
मानूंगी सदा वचनो को तुम्हारे
बात इतनी सी मेरी भी मानो

साया बन साथ सदा रहूंगी
ना आपसे दूर कभी भागूंगी
बनूँगी आदर्श बेटी मै आपकी
सम्मान तुम्हे मै हर पल दूंगी

ना मै स्वयं बांधूगी कभी
गन्धर्व विवाह के बंधनों में
भाग के आपसे दूर कभी
ना जीवन जीऊँगी उपवनों में

बनता है यह एक कारण भी
भ्रूण में होती हत्याओं का
ना बनूँगी परिभाषा मै इसकी
पल रहे पेट में कन्याओं का

कर मर्दन परिवार की मर्यादाओं का
करती है समाज को कलंकित ये
कलुषित कर पिता के नाम को
सम्मान को उनके हरती है ये

अपने सुन्दर आचरणों से
विचारों को समाज के मै बदलूंगी
ना फिर होंगी भ्रूण हत्याए कभी
सिद्धांतो से अपने हर भ्रूण को नया जीवन दूंगी || ”