||शास्वत सत्य जीवन का ||

जाना है एक दिन सबको
इस घर से ईश्वर के उस घर तक
फिर क्यूँ यह जाल रचा है माया का
ले बचपन से मौत की सय्या तक

होक विलीन इस मृदा में सबको
दूर इस जहाँ से जाना है
सजाया है जो इस तन को खूब
मिटटी में इसे मिल जाना है

रिश्ते,नाते ,दोस्ती ,यारी
सब धरे यहाँ रह जाते है
अपने अच्छे कर्मों से ही
लोग ख्याति यहाँ पे पाते है

जीवन की इस कीर्ति से फिर
अमर यहाँ हो जाते है
मरणोपरांत भी अपने अच्छे कर्मों से
सदियों तक पूजे जाते है

ऊँचे परिवारों के लोग भी
रईशी पे इतराने वाले
शक्ति के मद में चूर
शौर्य प्रदर्शन करने वाले

इस श्मशान में सबको आना है
होके खाक इस मिटटी में मिल जाना है

जीवन के इस शास्वत सत्य को
स्वीकार सभी को करना होगा
मोक्ष की प्राप्ति हेतु हमें अब
उस ईश के मार्ग पे चलना होगा ||