“हुस्न”तकदीर”डॉ. मोबीन ख़ान

# तेरे हुस्न की नज़ाकत में
सारा ज़हा बिखरा पड़ा है।।

कौन कहता है घर बर्बाद हुआ तेरा
देखो तेरे दीवानों का घर उज़णा पड़ा है।।

# अब जब हमें वो याद ही नहीं करते
हम खुद की तस्वीर देख लेते हैं।।

लगता है हर घड़ी साथ है उनका
बस अपने हाथों की लकीर देख लेते हैं।।

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/10/2015

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