||माँ || है ईश्वर का वरदान ..

“थक,हार दिनभर जब कार्यों से
घर अपने मै जाता हु
पाके माँ का अतुल स्नेह
दर्द सभी भुला जाता हु

हाथों से बने पकवान जो उसके
क्षुधा मेरी मिटाते है
देते नयी स्फूर्ति पुनः और
जीवन को स्वस्थ बनाते है

लोरी उसकी कानों में
आज भी गूंजा करती है
चम्पी उसकी बालों में
थकान को आज भी हरती है

स्नेह का वो आँचल उसका
जो बारिश से हमें बचाता था
होता था मै जन्नत में
रख सर पैरों में उसके जब सोता था

दूध का कर्ज कभी तेरे
अदा मुझसे क्या होगा
गर नाराज है तू कभी
तो खुश मुझसे खुदा क्या होगा ||”

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/10/2015
  2. omendra.shukla omendra.shukla 23/10/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/10/2015
  4. omendra.shukla omendra.shukla 24/10/2015

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