“मोहताज़” डॉ. मोबीन ख़ान

आज तो हम सब जी भर कर खाए,
पर क्या किसी गरीब को खाना खिलाये।।

खुशियां मनाने में तो कोई कसर छोड़ी ही नहीं,
पर क्या रोते हुए के संग खुशियां मनाये।।

ईद के दिन तो मेले में इंतहा ही कर दी,
पर क्या किसी मोहताज़ को मेला दिखाये।।

हर सड़क हर चौराहे पर रावण जलाये,
पर क्या अपने दिल में छिपे रावण को हम जलाये।

आज तो हम सब जी भर कर खाए,
पर क्या किसी गरीब को खाना खिलाये।।

4 Comments

  1. Shyam Shyam tiwari 23/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/10/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/10/2015
  4. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 23/10/2015