हो गयी है शाम , लौट के अब तो आजाओ

हो गयी है शाम
लौट के अब तो आजाओ
सुर्ख पड़े इन अधरों पे
मुस्कान फिर से बिखरा जाओ ..

करदो पूरी अंतिम ख्वाईश
अधिकार इतना दे जाओ
आगोश में करके फिर से हमको
वो प्रेम निशानी दे जाओ …

कुछ सपने अधूरे पड़े है आज
उन सुनहरे मिलन की यादों में
क्या होंगे पुरे फिर से वो
या होंगे दफ़न फिर वादों में …

बनके साया मेरा तुम
मुकद्दर में मेरे फिर आजाओ
जीने की एक उम्मीद आज फिर
इन आखों में तुम दे जाओ ….