आर्तनाद

हे युवक सुनो मेरा विचार यह जग अशांति से बेसुमार ।

चहुँदिश दिखते लहलहे वृक्ष पर हरियाली नही लेशमात्र ।
वैसे तो सभी निकटवर्ती किंतु कौन विश्वासपात्र ।।
आये दिन के तूफानों से हम लाख बचाकर चलते हैं ।
पर बचें कौन इनसे ये तो सबकी झोली में पलते हैं ।।

दम तो है किसी मे कुछ भी नहीं पर सब तो एटम बम ही हैं ।
सबको है यही गलतफहमी कि और तो मुझसे कम ही हैं ।।
इस रमणीक धरा को तुम श्मशान नहीं उद्यान बनाओ ।
शूलों से कर रहित इसे तुम पुष्पों के ही वृक्ष लगाओ ।।

उद्यान बनाओ सब मिलकर आपस में सबसे प्रेम करो ।
जब से संभलो तुम तभी ठीक जल्दी संभलो ना देर करो ।
कुछ लेकर यहाँ न आये हैं न लेकर यहाँ से जाऐगें ।
अपने सद्कर्मो के ही कारण हम इस जग में जाने जाऐगें ।

इसलिए त्याग कर बैर भाव न्यौछावर करो निज स्नेहागार ।

राज कुमार गुप्ता – “ राज “

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/10/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 21/10/2015
  2. anuj 20/10/2015
  3. anuj 20/10/2015
  4. anuj 20/10/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 21/10/2015
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2015
    • RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 21/10/2015

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