रोको ना इस दिल को तुम , मत तन्हाई में खो जाने दो

रोको ना इस दिल को तुम
मत तन्हाई में खो जाने दो
तोडके सारे बंधन आज
हद से इसे गुजर जाने दो ,
क्यूँ ख्वाबों के पंख बुनें ये
क्यूँ सपनों में खो जाये
दहकती अंतर्मन की ज्वाला में
क्यूँ ना स्वयं समां जाये ,
शांत पड़े उस साहिल पर
क्यूँ ना फिर उफान मचाये
छीन मुकद्दर से सांसे उसकी
इतिहास नया लिख जाने दो
रोको ना इस दिल को तुम ……
सिसक-सिसक ना अब रोना है
ना पलकों को फिर धोना है
लब पर आहें ,आँख में आंसू
ना संग इनके अब जीना है ,
भूलके सारी रसमों को
तोडके सारी कसमों को
थोड़ा सा इन अधरों को
उच्छृंखल अब हो जाने दो
रोको ना इस दिल को तुम …..
प्रियतम संग फिर प्रेम रचाये
सम्मोहन में उसके खो जाये
अनकहे व्याकुल अल्फाजों को
प्रियतम तक फिर पहुचाये ,
ज्योति नयी फिर प्रेम अगन की
प्रियतम के दिल में बस जाएँ
मदमस्त मगन इस यौवन का
रस कहीं छलक सा जाने दो
रोको ना इस दिल को तुम …..