नेताजी फिर आये है , संग विकास का नारा लाये है

नेताजी फिर आये है
संग विकास का नारा लाये है
गलियां होंगी रोशन सारी
कुछ ऐसी बात सुनाये है ,
गावों में विद्यालय होंगे
सड़के होंगी बाज़ारों तक
यातायात बहुल होंगे सब
खलियानों से फिर शहरों तक,
होंगे गावों में भी रोजगार
कुछ ऐसा मंत्र सुनाये है
नेताजी फिर आये है ….
वादे होते है बड़े-बड़े
सभाए होती है चुनावों में
छूके पैर, जोडके हाथ
फिरता है हर कोई गावों में ,
लेके वोट की लालसा मन में
उड़ाते है पैसे हवाओं में ,
मंदिर-मस्जिद का पाढ पढ़ाने
लोग यहाँ फिर आये है
नेताजी फिर आये है ……
तुमहि भैय्या ,तुमही बाबू
और तुमहि नाव खेवैया हो
तुमहि भाग्यविधाता हमरे
तुमहि रासरचैया हो ,
जितावों ये दंगल हमको
बन हमरी परछाईयाँ हो
बन गिरगिट फिर नेताजी
रंग बदलने आये है
नेताजी फिर आये है ….