क्यूँ लबों पे वो नाम, आज फिर से आये है

क्यूँ लबों पे वो नाम
आज फिर से आये है
बहकी हुई आखों में आज
फिर से ख्वाब छाये है ,
दिल क्यूँ धड़का है आज
उस अजनबी के लिए
चला था मुकद्दर को बदलने
कभी उस फरेबी के लिए ,
हो गयी तनहा सांसे फ़ना
उस सितमगर की याद में ,
अस्कों से पलकों को बचाते रहे हम
गेसुओं की बरसात में …||