“चिराग़” डॉ. मोबीन ख़ान

चिराग़ बन कर ज़लता रहूँगा मैं तेरे रास्तों में,
हर मुसीबतों से तुम्हें बचाता रहूँगा।।

बस मेरी आबरू का ख़याल रखना हमेशा,
मैं तेरा साया बनकर हमेशा साथ चलता रहूँगा।।।

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/10/2015

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