लगा दे पानी में जो आग पल भर में, बन के वो ज्वाला मै सीने में दहकता हू ||

इतिहास नहीं आता मुझको
पर यादों में जीता रहता हू
नहीं पढ़ा भूगोल कभी मैंने
पर चेहरे पढता रहता हू ,
नहीं समझ भावो की मुझको
पर मै रिश्ते जोड़ना जानता हू
इंसानो की परख नहीं
पर मै प्रेम निभाना जानता हू ,
नहीं ख्वाहिश महलो की मुझको
मै दिल में उनके रहता हू
बिखेर होठो पे हसीं नित्य मै
गम सारे उनके पीता हू,
आफ़ताब बन मै आखों का
रूह को रोशन करता हू
बनके जिंदगी हवाओं में
नस-नस में दौड़ा करता हू ,
बिखरने की परवाह ना कर
मै साहिल को चूमा करता हू,
लगा दे पानी में जो आग पल भर में
बन के वो ज्वाला मै सीने में दहकता हू ||

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया dknivatiya 19/10/2015
  2. RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 19/10/2015

Leave a Reply