यादों का दस्तावेज़… (नज़्म)

यादों का दस्तावेज़

वक़्त की पुरानी दराज़ से यादों का एक दस्तावेज़ मिला है आज। कहीं कहीं से तारीखों से क़ुतरा हुआ, हर्फ़ भी जिसके कुछ धुंधले जान पड़ते थे।
ज़िन्दगी के कई फसाने दर्ज मिले उसमें। कहीं बचपन का अल्हड़पन था तो कहीं जवानी की शरारतें दर्ज मिलीं। कहीं जीत का जश्न था तो कहीं मायूसी का लिबास ओढ़े थी ज़िन्दगी।
फिर अचानक एक कोरे सफ़े पर जाकर नज़र टिक गयी।
ऊपर मेरा नाम लिख कर किसी ने काटा हुआ था शायद, और नीचे दस्तख़त थे तुम्हारे…..

हर्फ़ = letters/alphabets

— अमिताभ ‘आलेख’

6 Comments

  1. omendra.shukla omendra.shukla 19/10/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 19/10/2015
  2. डी. के. निवातिया dknivatiya 19/10/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 20/10/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir 19/10/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 20/10/2015

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