माया

इक हसीन ख्वाब ने कली का रूप ले कर आँगन में मेरे घर बनाया है
होठों पर हंसी सजाए तो था लेकिन आपने इसे अब सुंदर बनाया है

मुझे फिक्र नहीं खुदा के हजार दर्शनों के, जबसे मुझे ढूंढती नजरों ने प्यार दर्शाया है
सारी जन्नतें थम सी जाती हैं, नजरें झुका कर आपने जो शर्माया है

वो डूबता सूरज तेरी ओठों के आब में आज क्यों नहाया है
गुलाब की नाजुक पंखों ने न जाने कब तेरी गालों का रंग चुराया है

तेरी मासूमियत की कोमलता को तितलियों ने भी अपनाया है
नजरें ऐसे मिली जैसे तेरी तडप के पत्तों पर पड़ा दिल ओस बनकर पथराया है

तेरी सीरत के सुगंध से कस्तूरी मृग भी आज बौराया है
तेरे रूप की उष्नता ने कितने ही चातक की तृष्णा को बुझाया है

आनंद के सागर में डूबा मेरा अस्तित्व बस तुम में ही रमाया है
अब उपाय क्या करूं बताओ जो तुम कहो सब माया है

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया dknivatiya 19/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir 19/10/2015

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