“आफ़ताब” डॉ. मोबीन ख़ान

गुजारिश है कि चलो एक नया आफताब लेकर आएं।
दिल के कोने में उसे जी भर कर जलाएं|

जिनकी जिंदगी में हर तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा है।
अपना दिल जला कर उनकी ज़िंदगी में रोशनी फैलाएं।

हुकूमतें तो अपना काम करती ही रहेंगी।
आओ ना एक बार हम भी हद से गुजर जाएं।

इस जहां के हर जर्रे-जर्रे से मोहब्बत करें और मोहब्बत ही फैलाएं।।
गुजारिश है कि चलो एक नया आफताब लेकर आएं….।।

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया dknivatiya 18/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/10/2015
  3. swetarchi 21/10/2015

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