मुक्तक

चिलचिलाती धूप में ,
हम छॉंव को खोजे कहाँ |
इन गगन चुम्बी भवन में ,
हम गॉंव को खोजे कहाँ |
कट चुके हैं सारे जंगल ,
सब जगह वीरान है ,,
अनवरत जो चल सकें,
उन पॉँव को खोजे कहाँ |
आदेश कुमार पंकज

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 18/10/2015
  2. डी. के. निवातिया dknivatiya 18/10/2015
  3. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 19/10/2015

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