“मज़हब” डॉ. मोबीन ख़ान

सिर्फ अल्फ़ाज़ों का ही खेल है मोबीन,
ये काफ़ी हैं मुल्क़ की बर्बादी के लिए।।

अब ऐलान-ए-ज़ंग की ज़रूरत नहीं,
मज़हब ही काफ़ी हैं इस ज़हा में क़त्ल-ऍ-आम के लिए।।

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 18/10/2015
  2. डी. के. निवातिया dknivatiya 18/10/2015

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