रंगत………..

अजीब रंगत है मेरे यार की
जिसे देखकर सारा जहां रंगीन नजर आता है !
जब तक न हो दीदार ऐ यार के,
इस बेताब दिल को भला कहा चैन आता है !
तुम ही अब दिल की धड़कन,
अब तो तेरे बिना ये शरीर बे जान नजर आता है !
ऐ रब ये बता ऐसी क्या बात है उसमे,
जिसके बिना अब संसार भी वीरान नजर आता है !!

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——:: डी. के. निवातियाँ ::——

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/10/2015
    • डी. के. निवातिया dknivatiya 17/10/2015
  2. sushil SUSHIL 17/10/2015
    • डी. के. निवातिया dknivatiya 17/10/2015
  3. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 19/10/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/10/2015

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