भूले – बिसरे

चन्द रोज की बारिश ,
फिज़ा में सैलाब ले आयी !
हम रोए तमाम उम्र ,
सावन सूखा बना रहा !

ए दिल बता तुझे आता क्या है ?
मेरे दिल को थोड़ा चैन आये ;
तो तेरा जाता क्या है ?

कहते हैं की मोहब्बत
जिंदगी बदल देती है,
अच्छे भले इंसान को
आवारा बना दिया !

तेरे वादे पे ऐतबार कर
बैरी हुए ज़माने से ,
हमें क्या ख़बर की
ये सौदा बड़ा महँगा है !

दिल टूटने से यारों
दर्द बहुत होता है,
वरना दिल्लगी की
हमारी आदत पुरानी है !

इक तेरे जाने से फिजा की
रौनक चली गयी,
हमें क्या ख़बर थी
तुम इतनी संगदिल हो !

सालों गुजर गए
तेरा चेहरा नहीं देखा ,
पर ऐसे लगता है जैसे
कल ही की तो बात है !

कहते है जिसे इश्क़
और कुछ नहीं ,
बस एक जरिया था
हमारी बर्बादी का !


अगर ये रात न होती ,
बेहिसाब तारों की बरात न होती ,
जमाना – ए -आदम से मोहब्बत कायम है
मगर फिर भी ये दुनिया यूँ आबाद न होती ||

||

यूँ ख्वाबों में आकर मुझे सताया न करो ,
बार-बार याद आकर रुलाया ना करो ,
या तो मेरे हो जाओ क़यामत तक –
वरना चाहत की तपिश से अपनी मुझे जलाया न करो ||

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया dknivatiya 17/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/10/2015

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