कब बड़ी हो जाती है बेटियाँ

कब पालना छूट जाता है, कब बचपन गुजर जाता है
कब घुटनों के बल चलते चलते, कंधे से कंधा मिल जाता है
वक्त देखते देखते न जाने कैसे इतना जल्दी गुजर जाता है
कब बड़ी हो जाती है बेटियाँ, ये दिल जान नहीं पाता है

आँखें बन्द करूं तो नन्हीं परियों की उड़ान याद आती है
वो थोड़ा रूठने के बाद शरारत भरी मुस्कान याद आती है
कल ही की बात सा वो मंजर नजरों में समा जाता है
कब बड़ी हो जाती है बेटियाँ, ये दिल जान नहीं पाता है

चेहरे पर इन आँखों की तरह होती हैं बेटियाँ,
हर पल खुशी का एहसास होती हैं बेटियाँ
नाजुक सा दिल रखती हैं, मासूम होती हैं बेटियाँ
घर महक उठता है जब मुस्कुराती है बेटियाँ
यूँ ही नहीं इनको ईश्वर का वरदान समझा जाता है
कब बड़ी हो जाती है बेटियाँ, ये दिल जान नहीं पाता है

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/10/2015

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