उत्तम का कलरव

एक विस्तृत निस्तब्ध रात हूँ
चांद तारों से भरपूर, फिर भी
लौकिक वितृष्णा का पात्र हूँ।
आज आकर्षण बिन्दुसम है
चाँद तारे लेकिन क्या कम है?
आकर्षित होगा जब जग सारा
भास्कर होगा यही सितारा!
मुझमें समा जाएगा सब तब
तरंगित होगा उत्तम का कलरव।।

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir 15/10/2015

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