क्षणिकाए – शिशिर “मधुकर”

१. वो गम भी क्या गम है
जो मैं अपनी जुबां से कह दूँ
ओ दिल वालों तुम तो समझो
कि ये दिल का मामला है .

२. तेरी बातों में है वो अपनापन
अपनों से मिला था जो हमको
जब उनको भूल सके ना हम
कैसे भूलेंगे अब तुमको.

३. इस बारिश में कैसे भीगूँ मैं
मेरे दिल का कागज़ है गला हुआ
इस गले हुए कागज़ पर भी
महबूब का नाम है लिखा हुआ.

४. माना कि दोस्ती मैं हो जाता है प्यार
लेकिन क्या इसका उल्टा भी संभव हे मेरे यार
यदि नहीं है संभव तो फिर कैसी तक़रार
प्यार, प्यार ही रहा था और रहेगा प्यार.

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. Girija Girija 16/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/10/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/10/2015
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/10/2015
  5. yudhi 06/02/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/02/2016

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