प्यास

वह प्यासा है —
दो बूंद हैं उसके होठों पर
ढलक रही है जो नीचे
जिव्हा तडप रही है —
लपक रही है
उन बूँदों के लिए
मगर अफसोस —
समय निकल चुका था
बूँदें ढलक चुकी थी
वह जीवन का प्यासा था!
हम जीवन के प्यासे हैं।

— Uttam Tekriwal

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/10/2015
    • Uttam Uttam 15/10/2015
  3. Bimla Dhillon 15/10/2015

Leave a Reply