आओ तूफानों में

आओ तूफानों में नाव चलाया जाए
अपनी मकसद लहरों से बताया जाए

इन जिन्दा गलियों में खामोशी क्यों है
मन झूमे ऐसा गीत कोई सुनाया जाए

बहुत हुआ खेल लहू का भाई भाई में
अब मिलकर दूजे को गले लगाया जाए

ये धरती उगलेगी हीरे कुंदन लेकिन पहले
खेत में मेहनत के दो बूंद बहाया जाए

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/10/2015

Leave a Reply