रिश्तों का विज्ञान -शिशिर “मधुकर”

रिश्तों का विज्ञान समझना सबके बस की बात नहीं
जिनको ज्ञान है इस विद्या का उनको लगता आघात नहीं
जो होता नहीं वो दिखता है यहाँ जो दिखता नहीं वो होता है
इस कलयुगी सयानी दुनियां में हर निष्कपट आदमी रोता है
अपने स्वार्थ सिद्ध करने को सबके पास हैं तर्क यहाँ
इस हमाम में सब नंगे हैं न्याय की बात तुम करो जहाँ
जैसे जैसे परिवारों में अगली पीढ़ियाँ आती हैं
ऐसे अन्यायों की कारण रिश्तों की लाशें बिछ जाती हैं
बड़े बुजुर्ग भी इन मसलों में अपना रंग दिखाते हैं
अपने दुर्योधनों की ख़ातिर धृतराष्ट्र बन जातें हैं
कितनी सदियाँ बीत गईं पर हालत अभी ना बदली हैं
भाई चारे प्यार मोहब्बत की बातें सब नकली हैं
वो वक्त ना जाने कब आएगा होगा जब कोई घात नहीं
रिश्तों का विज्ञान समझना सबके बस की बात नहीं
जिनको ज्ञान है इस विद्या का उनको लगता आघात नहीं.

शिशिर “मधुकर”

8 Comments

  1. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 12/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/10/2015
  3. SONIKA SONIKA 12/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/10/2015
  4. Bimla Dhillon 13/10/2015
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/10/2015

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