देखा अंदाज़-ए-बयाँ…

देखा अंदाज़-ए-बयाँ जब उसका।
हमको अपने पे यूं मलाल हुआ।।

दास्ताँ उसने कुछ अदा से कही।
बज़्म-ए-अशआर में शुमार हुआ।।

क़त्ल का कोई सामां न था फिर भी।
निगाह-ए-तीर से रौशन ये कमाल हुआ।।

निकल पड़ा है जलाने दिये वो तूफ़ाँ में।
मौत से उसका भी अब करार हुआ।।

मचल रहा था ‘आलेख’ हवा में उड़ने को।
क़ैद था जिस्म में जो अब फ़रार हुआ।।

— अमिताभ ‘आलेख’

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/10/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 11/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/10/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 12/10/2015
      • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/10/2015
        • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 12/10/2015

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