सिर्फ …..

तुझे दिल के किसी कोने में छुपाना चाहूँ ,
तुझे बार – बार देखू और मुस्कराना चाहूँ |

तेरी आँखों से पीने की आदत सी हो गयी है,
मै कमअक्ल तो नही जो अब भी पैमाना चाहूँ |

उनकी नजरें इनायत कुछ यूँ हुयी हम पर ,
इस जिंदगी के समंदर में तेरा ही किनारा चाहूँ |

तेरे गेसुओं को छूकर जो हवा आई है ,
उन हवाओं की महक को अपनी साँसों में बसाना चाहूँ |

कभी वक्त – बेवक्त जिस कलाई को थामा था मैंने ,
अब उन हाथों में अपने नाम के कंगन सजाना चाहूँ |

तमाम उम्र बीत जाये एक पल में जैसे ,
इस कदर तेरे ख्वाब में सो जाना चाहूँ |

ना कुछ और चाहूँ सिवा तेरी मुहब्बत के ,
बाखुशी दुनिया के हर इंतिहान आजमाना चाहूँ |

आखरी मुलाकात में जो रूमाल मेरा पहलू में छोड़ा तुमने ,
ताउम्र उसे ओढु , और उसी में लिपट के मर जाना चाहूँ ||

7 Comments

  1. Rinki Raut Rinki Raut 13/10/2015
    • sushil sushil 13/10/2015
  2. SONIKA SONIKA 13/10/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/10/2015
  4. sushil sushil 13/10/2015
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/10/2015

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