“सच” डॉ. मोबीन ख़ान

सच क्यों पसंद करेगा तू,
कहीं तेरा वजूद ना खत्म हो जाए|

बस इसी कशमकश में जीते रहना,
कहीं तेरी जिंदगी न खत्म हो जाए।

तुझे एक बार अपनी गलती का एहसास होगा,
भले ही तेरे हिस्से की साँसे खत्म हो जाए।।

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/10/2015

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