song- गुमसुम गुमसुम

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गुमसुम – गुमसुम क्यों हैं, पल ये सारे
शोर मचा के हम-तुम, क्यों ना भागें |
आहिस्ता – आहिस्ता, लब को खोलें
तोड़े सभी बंदिशों, के धागे |
रस्में अंजानी जो, जग की लगे
कर लेंगे फिर थोड़ी, ढीली बातें |
फिक्र फ़ितूर की, रहने भी दो
खुशियाँ थोड़ी सी क्यों ना, गम से बाँटें |
गुमसुम – गुमसुम क्यों हैं, पल ये सारे
शोर मचा के हम-तुम, क्यों ना भागे ||

शर्मीला दिल जो भी, करना चाहे
या फिर जो दिल का दिल, उछले गाए |
परवाह करो ना बातें, होनी ही है
बातों – बातों में लम्हा, ना बीते जाए |
सिक्के हँसी के थोड़े, खर्चे करें
तितली के जैसे पकड़े, खुशियों के साये |
ख्वाबों के रंगों से, खुद को रंगे
इक आशियाँ तेरे-मेरे, नाम आये |
गुमसुम – गुमसुम क्यों हैं, पल ये सारे
शोर मचा के हम-तुम, क्यों ना भागे ||

थक कर के जब लेटें, अम्बर तले
तारे गिन लेना थोड़े, तुम चुपके से |
आधे तारों से बने, इक आशियाँ
बाकि आधे का क्या? पूछेंगे चंदा से |
गुमसुम – गुमसुम क्यों हैं, पल ये सारे
शोर मचा के हम-तुम, क्यों ना भागे ||
गुमसुम – गुमसुम क्यों हैं, पल ये सारे
शोर मचा के हम-तुम, क्यों ना भागे |||||||||||||||

By Roshan Soni