अंकुर

अनदेखी है ,अनजानी है ,
अद्भुत है , नूरानी है |
जो कुछ भी है वो, जैसी भी है ,
प्यार की पहली निशानी है ||
ना सोचा था , ना चाहा था ,
ना रोपा था , ना बोया था |
प्यार के बहते दरिया से ,
धीरे से अंकुर फूट पड़ा ,
कुछ समझ सके , न सोच सके
उसे चाहे से भी या ना रोक सके |
जाने क्या सम्मोहन था ,
नन्ही कोपल को न तोड़ सके ||
धीरे से एक एहसास नया ,
हम सबको झकझोर गया |
उसके आने की आहट से ,
आया जीवन में मोड़ नया ||
दिन रैन खयाल बसे मन में ,
आ जाओ तुम्हारा स्वागत है |
प्रेम प्रतीक अमर हो जाओ ,
हम सबकी ये चाहत है ||
जो भी हो तुम ,जैसी भी हो ,
मेरे मन की पंछी हो |
अरमानों की राग बजाए ,
वो ह्रदय पटल की बंसी हो …………..

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/10/2015
    • sushil sushil 09/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/10/2015

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