आके पूछ तू इस पागल से//ग़ज़ल//

आ ठहरा है तूफ़ान ज़िन्दगी में आके ।
जबसे गयी है तू मेरा दिल तोड़ के ।।

तू उजाड़ चली है मेरे सपनो के नगर
मुझे थमा गयी है तू तोहफें गम के ।

मेरे दिल की आलम आके देख तो सही
ज़िन्दगी के पल पल कटता है मुश्किल से ।

अरे सुन मेरे दिल की इल्तिज़ा कभी तू
लिख प्रेम दर्द भरी ख़त मेरे नाम से ।

चाँद सा चेहरा मुरझाया है तुमबिन
मेरे आँगन आ जा दिल में प्यार लेके ।

प्रेम बरसने आ जा बनके सावन
भिगो जा तपती हुई आँगन दिल के ।

तुम्हारी इंतज़ार है हरघडी ज़िन्दगी को
कुर्बा है दिल आ आजमा के देख ले ।

आके मिल तू मुझमें इस तरह
जैसे मिलती है नदी सागर से ।

क्या – क्या गम सहे तेरे लिये
आके पूछ तू इस पागल से ।

दुष्यंत पटेल [कृष]

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/10/2015

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