कैक्टस – शिशिर “मधुकर”

कुदरत ने अपने सब गुण इस जहाँ में बाटें हैं
कैक्टस ऐसा पौधा है जिसमे केवल कांटें हैं
हो कितनी भी अच्छी मिट्टी जहाँ भी ये वट लगेगा
तुम चाहो या फिर ना चाहो काटों का संग मिलेगा
मखमली हाथों से भी गर तुम इसे छुओगे
केवल मिलेंगी चोटें और ज़हर तुम पीओगे
इसके कुल के पौधे भी सब ऐसे ही होते हैं
मिल जाए जब भी मौका वो डंक चुभोते है
कैसे हुई ना जाने ये हमसे बड़ी नादांनी
कैक्टसों को हमें चाहा आँखों में अब है पानी.

शिशिर “मधुकर”

11 Comments

  1. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 09/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/10/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/10/2015
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/10/2015
  5. Manjusha Manjusha 21/10/2016
  6. Manjusha Manjusha 21/10/2016
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/10/2016
  8. C.M. Sharma babucm 21/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir 22/10/2016
  9. mani mani 21/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir 22/10/2016

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