बदनसीब शायर

हर-एक शायर का कोई न कोई निशाँ रहता है।
हर-एक चेहरा किसी चेहरे पर फ़ना रहता है।
कुदरत लिखने के लिए वादियों की जरुरत नहीं।
जहाँ ख्याल ले जाना चाहे वो वहाँ रहता है।
एहतराम करता है लफ्जों का खुद से जायदा।
शायर का बस इतना सा तो गुनाह रहता है।
जिसने जीते जी करी हो शायरी से मोहब्बत।
वो शख्श मरने के बाद भी परेशाँ रहता है।
राकेश।

7 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 08/10/2015
  2. राकेश जयहिन्द राकेश जयहिन्द 08/10/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir 08/10/2015
  4. roshan soni roshan soni 08/10/2015
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/10/2015
  6. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 09/10/2015

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