दोहा

कण -कण में भगवान है , कण – कण में है ओज |
पंकज फिर क्यों फिरत है , मन – मंदिर में खोज ||
पंकज जीवन चक्र में , ज्यों होते दिन – रात |
सुख -दुःख होते सदा , भगवन की सौगात ||
आदेश कुमार पंकज

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 08/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/10/2015

Leave a Reply