उसका इंतज़ार – शिशिर “मधुकर”

अब भी रहता है ना जाने क्यूँ
मुझको उसका इंतज़ार
लगता है मुझको सदा युहीं
आएगी देने वो स्नेह अपार
रहती है मेरी नज़र सदा
अपने ही दरवाजे पर
ज्यों होती है कोई आहट
लगता है आई वो दिल लेकर
लेकिन मेरे सारे सपनें
हो जाते हैं चूर चूर
जब उसकी परछाई भी
नहीं दिखती मुझको दूर दूर .

शिशिर “मधुकर”

4 Comments

  1. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 14/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/10/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/10/2015
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/10/2015

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