विवाह – शिशिर “मधुकर”

वो विवाह भी क्या विवाह, जो एक बंधन बन के रहे
बिन गर्व और सम्मान के , एक दूजे को सहता रहे.
जब दूसरे ही हमको सदा, अपनों से अच्छे लगें
तब प्रेम क्या विश्वास क्या, बस अपने अपनों को ठगे .
एक दूसरे की चाह का, जब दर्द आँखों में दिखे
दिल की कलम हर बार केवल, जब नाम उसका ही लिखे
हर समय विश्वास कर जो, साथ में चलता रहे
संसार भी केवल उन्ही के , प्रेम की बातें करे .
आनंद पाना चाहते हो तो, इस राह पर आगे बढ़ो
संशय के काटें छोड़ दो, और फूलों की राह को गढ़ो.
जब मन तुम्हारा सच्ची श्रद्धा, और प्रेम से भर जाएगा
जीवन का हर एक पल तुम्हे , तब शांत ही बनाएगा .

शिशिर “मधुकर”

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2015
  2. sushil sushil 07/10/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2015

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