भारी क्षण- शिशिर “मधुकर”

अब तो हमने ठान लिया है हम जीएंगे
जब तक सांस है तन में जहर ये हम पीएंगे
सुख तुमको जब दे नहीं पाए इस जीवन में
दुःख भी क्यों दे सोचते रहते है ये मन में
वैसे भी जीवन के वो क्षण होते है भारी
जिनमे मुरझाती आशा के फूलों की क्यारी.

शिशिर “मधुकर”

9 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 07/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2015
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/10/2015
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2015
  6. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 07/10/2015
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2015
  8. कुमार मंगल विकास कुमार 24/10/2015

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