तेरी बन्दिगी – शिशिर “मधुकर”

काश आ जाते तुम चुपके से मेरी-इस जिंदगी में
हम भी लगा लेते ये मन फिर तो तेरी बन्दिगी में .
तब हर तरफ फैली उदासी और गिले-शिकवे ना होते
अपनी मोहब्बत से सजे ये गुलशन सदा गुलज़ार होते.

शिशिर “मधुकर”

3 Comments

  1. Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 09/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/10/2015
  3. kuldeep 21/02/2016

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