साथी की तलाश- शिशिर “मधुकर”

मैं था जीवन में अकेला, थी साथी की तलाश
मिलते ही जिसके खो बैठा, मैं अपने होशो हवास
पूजा था उसको मैंने, और दिया पूर्ण विश्वास
पर ना जाने क्यों उसको, यह सब आया ना रास
मैं समझ सका ना उसको, होकर के प्रेम विभोर
शायद वह चाहती थी, मुझ से कुछ ही और
मैं कर ना सका पूरी, उसके मन की आस
यही है शायद कारण, वो नहीं है मेरे पास
वो भूल गई हो चाहे, पर मैं ना सकूँगा भूल
मेरे दिल में हमेशा चुभेगा, उसकी यादों का शूल
है मेरी यही गुज़ारिश, सब दोस्तों और यार
कुछ भी कर लो लेकिन, करना ना सच्चा प्यार
तुम प्यार करोगे सच्चा, पर कुछ ना होगा अच्छा
सिर्फ टूट जाएगा दिल, और बढ़ जाएंगी मुश्किल.

शिशिर “मधुकर”

2 Comments

  1. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 14/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/10/2015

Leave a Reply