दिल का दर्द – शिशिर “मधुकर”

केवल तूने मेरा दिल ही न तोडा
मुझे जिन्दा रहने काबिल भी न छोड़ा
अब किस्से कहूँ मैं दर्द इस दिल का
कोई सच्चा मीत नहीं है
मेरी पीड़ा वो क्या समझेगा
जिसको सच्ची प्रीत नहीं है
अब दुनिया भी मुझ पर हँसती है
और मैं सब सहता जाता हूँ
कहना भी अगर कुछ चाहूँ तो
कुछ भी कह न पाता हूँ
सब कहते है की तेरा दिल था छोटा
पर शायद अपना भाग था खोटा
यदि ईश्वर सच है तो उसने भी
इस सच को पहचाना है
तू समझे चाहे झूठ इसे
उसने मेरे दर्द को जाना है.

शिशिर “मधुकर”

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/10/2015
  2. आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 'आलेख' 14/10/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/10/2015

Leave a Reply