अजीब किस्मत – शिशिर “मधुकर”

बात करने से पहले थे मन में कितने विचार
कभी अच्छा कभी बुरा सोचा था बार बार
पता नहीं अबकी क्यूँ अच्छा सोचा था ज्यादा
शायद बहना की शादी में लगती न थी कोई व्याधा
जैसे ही कानों में पिताजी के स्वर मुखरे
मैंने उनसे पूछा क्या अपने दिन है सुधरे
लेकिन उनके ये शब्द मुझको बहुत अखरे
कि लड़का शादी में दिखा रहा है नखरे
पता नहीं शादी भी अब तो बन गई है व्यापार
भावनाओं को तोड़ देना जिसमे आम बात है यार
पता नहीं मेरी भी किस्मत है कितनी अजीब
हर वो चीज़ चीन जाती है जो लगती है करीब
अब सोचता हूँ मैं भी इस किस्मत से टकराऊ
बन जाऊ इतना ताकतवर कि इसको मैं बनाऊँ.

शिशिर “मधुकर”

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/10/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 07/10/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2015

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