सच्चा साथी

भूल कर जो भूल हुई
भूल गए अन्जान समझकर
जो ख्वाब सजाकर रखे थे
रह गए अरमान अटक कर
थी खता हमारी इतनी सी
पत्थर पर बीज उगाया था
वो फूल कभी भी खिल ना सका
जज्बातो से जिसे सिंचाई या था
हम भूल गए कुछ पल के लिए
शीशे तो टूटा करते है
है वक्त वक्त के साथी सब
साये भी रूठा करते है
मै बूँद बनी उस सागर की
जो प्यास कभी बुझा ना सका
अपने ही अक्ष इस मोती को
दिल से कभी अपना ना सका
पछतावा तो होगा खोकर
अपने अमूल्य खजाने को
मोती पर क्या फर्क पडा
दुनिया भागे अपनाने को
सागर की खता है या दिलदारी
है प्रीत ये उसकी दुनिया से
या फिर मोती से गद्दारी
हो कष्ट भले ही मोती पर
पर अपनी चमक छिपा ना सका
जो जग मे उजाला करते है
वो नाम कोई मिटा ना सका
मै भूल जाऊ उसको एक दिन
कैसे भूले एहसान को
जो दर्द वो मुझको देकर गया
कहता है कदम बढाने को
वो है सच्चा साथी मेरा
जो मुझको चलना सिखाता है
अपनी कडवी सी बूटी से
मेरे दोष मिटाता है
साथी वही जो आगे रहे
गिरते कदम उठाने को
सारा जंहा है आगे खडा
झूठी वाहवाह लूटा ने को
प्यार सच्चा है सागर का
मोती को चमकना सिखाता है
वो प्यास भले ही बुझा ना सका
बनकर बारिश जो बरसे पानी
तो धरा को खुशहाल बनाता है
है उस पत्थर की दिलदारी
जो सही दिशा दिखाता है
पत्थर मिसाल है दृढता की
तभी तो पूजा जाता है
ना देखो नीम की कडवाहट
वो रोग मिटाने वाला है
सच्चा साथी अन्धकार मे
प्रकाश दिखाने वाला है
है एहसास तेरे कष्टो का
वो खुशिया लाने वाला है

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 05/10/2015
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 06/10/2015

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