मोह – शिशिर “मधुकर”

मोह से कितना दुःख होता है
ये मैंने अब जाना
यदि न हो ये संग अपने
मिलता है सुख अंजाना
भावुक होना है पागलपन
इसका कोई नहीं है मोल
यदि इस जग में जीना है तो
सीधी सच्ची बोली बोल
दुनिया भर के साथ चलो
और बन जाओ यथार्थ्रवादी
यदि नहीं करोगे तुम ऐसा
हर मोड़ पे होगी बर्बादी
यदि अब भी तुम नहीं सुधरे तो
कुछ ऐसे धोखे खाओगे
जीवन भर करोगे कोशिश
उनके गम से उबर न पाओगे.

शिशिर “मधुकर”

8 Comments

  1. Uttam Uttam 06/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/10/2015
  2. राकेश जयहिन्द राकेश जयहिन्द 06/10/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/10/2015
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/10/2015
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2015

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