आरक्षण

इधर उधर दौडी नजर
थी हर जगह एक ही खबर
जो भी हो जैसे भी हो
जाति का उद्धार कराना है
हमे ज्ञान नही भाइयो
आरक्षण लेकर जाना है
हम आरक्षण की खातिर
धरने पर धरना लगायेंगे
चलते फिरते गलियारे को
हम सुनसान बनायेंगे
मेरी नजर से देखो तो
आरक्षण विकलांग बनाता है
जाति की तो क्या छोडो
देश को कंगाल बनाताहै
आरक्षण से पडे फूट
उठते है रोष मन मे
सहायता का भाव नही
आती क्रूर दृष्टि जन मे
जो रूक गई प्रगति देश की
ये आरक्षण का आशीर्वाद है
पैसा बहुत है पर योग्यता नही
ये आरक्षण का प्रसाद है
जो मेहनत से कतराते है
वो आरक्षण की मांग उठाते है
जिसमे हो दम आकर ले जाये
फिर क्यू इतने घबराते है
मिले आरक्षण आर्थिक आधार पर
क्यू जाति मे इसको बाँधा है
उच्च जाति का गरीब भी तो
इस सरणी मे आता है
गरीबी मिटाने का हथियार
क्या आरक्षण बन पायेगा
या सिर्फ जाति में बँधकर
गरीबी ओर बढाये गा
आरक्षण का लेकर सहारा
आगे तो बढ जाते है
क्या देश की प्रगति में
वो सही लाभ दे पाते है
योग्यता किसी की भी
किसी जाति की मोहताज नही
मिला बराबर दिमाग सभी को
किसी भी ऊँची नीची जाति का
चलता कभी भी राज नही