माँ

माँ ही मंदिर ,
माँ ही तीरथ ,
माँ ही चारों धाम |
माँ का जो आशीष मिले तो ,
पूरें हो जायें सब काम |
माँ ही मंदिर ,
माँ ही तीरथ ,
माँ ही चारों धाम |
सुख और दुःख की साथी होती ,
बच्चों के दुःख में वह रोती ,
माँ प्यार लुटाती आठों याम |
माँ ही मंदिर ,
माँ ही तीरथ ,
माँ ही चारों धाम |
अनगिन रातें सदा जगी हैं ,
लोरी देते नहीं थकी है ,
माँ तो होती अमिट ललाम |
माँ ही मंदिर ,
माँ ही तीरथ ,
माँ ही चारों धाम |
माँ का आँचल होता जन्नत ,
माँ पूरी करती हर मन्नत ,
माँ ही होती सुबह – शाम |
माँ ही मंदिर ,
माँ ही तीरथ ,
माँ ही चारों धाम |
माँ ही तो सर्वोपरि है ,
माँ ही तो गुर्वोपरि है ,
माँ शिक्षक होती अविराम |
माँ ही मंदिर ,
माँ ही तीरथ ,
माँ ही चारों धाम |
माँ बरगद की छाँव होती ,
माँ हम सबकी गाँव होती ,
माँ को मेरा कोटि प्रणाम |
माँ ही मंदिर ,
माँ ही तीरथ ,
आदेश कुमार पंकज

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/10/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/10/2015

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