एक पगली शाम

एक पगली शाम की बात है…!!!

जब हम थके हारे कम से लौटते थे,
और बीवी हमारे पास आती थी !!

हमारे दफ्तर हाथो से लेकर,
पास वाले मेज पर रखती थी!!

हमें सोफे पर बिठाकर हमें,
चाय और पानी पिलाती थी!!

एक पगली रात की बात हे…!!!

जब हम रात को कुछ काम कर रहे होते थे,
और बीवी हमारी, गुस्से से लाल होती थी!!

हम काम को दफ्तर में रख देते,
और वो मुस्कुराकर हमसे लिपट जाती थी!!

प्यार का नशा छा जाता
हम उनमे उर वो हम्मे समां जाती थी!!

किसी की नजर लग गयी हमारे प्यार को
अब ना वो शाम रही ना वो रात रही!!

सब कुछ छुट गया पीछे ज़माने की इस भागादौड़ी में
न मुकलाकत होती न प्यार की वो बात रही!!

पहेले शाम को दफ्तर से आता था
अब दफ्तर से आते आते रात हो जाती!!

चाय और पानी तो दूर, हमारी राह तकते तकते
वो रात का खाना वही मेज पे लगाकर वही पे सो जाती!!

प्यार भर समां होता था दोनों के बिच
कुछ चार पैसे जादा कमाने के लिए प्यार के बिच दुरी रह जाती थी!!

एक पगली शाम की बात थी …!!
एक पगली रात की बात थी…!!

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 04/10/2015
    • Prashant 26/03/2016
  2. Prashant Magare 04/10/2015

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