बीत गए वो – शिशिर “मधुकर”

बीत गए वो सारे पल छिन
जिनका किया करते थे हम तुम
बेसब्री से इंतज़ार.
बीत गए वो सारे मौसम
जिनके आने पर कभी जब
गुलशन होते थे गुलज़ार.
बीत गया वो सफर सुहाना
जब फूलों की राहों पर
हम तुम मिलकर साथ चले थे.
बीत गई वो नई जवानी
जब सहमी सी हर धड़कन में
प्रीत के अपनी फूल खिले थे.
बीत नहीं क्यों अब जाती हैं
शिशिर तेरी लम्बी रातें
मधुकर-मधु की छल की बातें.

शिशिर “मधुकर”

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