प्यार का जादू- शिशिर “मधुकर”

तुझसे मिलने को दिल तड़पता है, ये तेरे प्यार का ही जादू है
कैसे समझाऊ मैं इस पागल को, दीवानगी में जो बेकाबू है

तुझे ये देख खिलखिलाता है, नशे में झूमता है गाता है
कहता है साथ में रहो मेरे, मैं तो कुछ भी नहीं हूँ बिन तेरे
मेरे जीवन में राग तुझसे है, जगमगाते चिराग तुझसे हैं
तू जो आती बहार आती हैं, कलियाँ धीमे से मुस्काती हैं
भँवरे भी कमाल करते हैं, फूलों को देख कर मचलते हैं
कहते हैं रुत ये ना कभी जाए, दूरियाँ दो दिलों में ना आए
प्रेम का ऐसा एक रंग बरसे, जिसे पाने को हर कोई तरसे
वक्त का चलना भी बेमानी हो, बेखुदी से भरी जिंदगानी हो
तेरी यादों में ही अब तो, मेरा शीशा ए दिल धड़कता है

तुझसे मिलने को दिल तड़पता है, ये तेरे प्यार का ही जादू है
कैसे समझाऊ मैं इस पागल को, दीवानगी में जो बेकाबू है

तेरे छूने से एक लहर सी उठ जाती है, मेरी आँखों में भी बिजली सी चमक जाती है
जब भी बाहों में हूँ भरता तुझको, कोई दुनियाँ ना मुझको नज़र आती है
तेरी साँसों में गुल महकते हैं, होटों पे शोले से दहकते हैं
मुझे सीने से जब तू लगाती है, मेरे अरमान भी बहकते हैं
तेरे संग जीने को दिल तरसता है, इस रूप का रस पीने को दिल तरसता है
मेरी आँखों से तू कभी ना हो ओझल, ख़ुदा से मिन्नतें ये बार बार करता है
जब भी गालों पे तेरे आते हैं, तेरे गेसू मुझे रिझाते हैं
तेरे लॉन्ग के हीरे में ना जाने, कितने हंसी ख्वाब झिलमिलाते हैं
तेरी हर मुस्कान में अब, मेरा इश्क़ ही झलकता हैं

तुझसे मिलने को दिल तड़पता है, ये तेरे प्यार का ही जादू है
कैसे समझाऊ मैं इस पागल को, दीवानगी में जो बेकाबू है

शिशिर “मधुकर”

Leave a Reply