प्रेम की तलाश -शिशिर “मधुकर”

मेरा मन कैसा है ये
सदा प्रेम की तलाश में रहता है
और हमेशा धोखे खाता है.
जो अच्छा लगता है और
जिससे मन कुछ पाना चाहता है
वो इसे समझ ही नही पाता
या यूँ कहो के मैं उसे समझा ही नही पाता.
ये भी हो सकता है कि समझने के बाद भी
वो मेरी आशाओं को मूल्यहीन समझता हो.
कारण जो भी हो इसके कारण
जीवन में एक अवसाद तो रहता ही है.
क्योंकि कितने कम भाग्यशाली ऐसे होते है
जिन्हे अपने मन कि इस खाई से
निकल पाने में सफलता मिलती है
और जीवन के आनंद को प्राप्त करने का
सुअवसर प्राप्त होता है
जो काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह से
सर्वथा परे है एवं केवल उल्लास देने वाला है.

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. Uttam Uttam 06/10/2015
  2. राकेश जयहिन्द राकेश जयहिन्द 06/10/2015
  3. Uttam Uttam 06/10/2015
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/10/2015
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/10/2015
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/10/2015

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