वो पत्थर दिल से चोटिल था

आँखों में आंसू मेरे भी थे और आँखों में आंसू उसके भी थे
फर्क सिर्फ ये था ,मुझे चोट लगी थी पत्थर से ,वो पत्थर दिल से चोटिल था
मुझे मेरे जख्मो की दवा मिल गयी ,उसे उसके जख्मो की दुआ मिल गयी
मेरा जख्म पैर पर नासूर था ,उसका जख्म दिल पर नासूर था
मैं तडपता था मुझे लगी चोट से ,वो तडपता था उसे मिली चोट से
उस अनजान राह में किसी अजनबी की तलाश मुझे भी थी और किसी अजनबी की तलाश उसे भी थी
सहारे की जरुरत मुझे भी थी सहारे की जरुरत उसे भी थी
फर्क सिर्फ ये था , मुझे किसी के सहारे से खड़ा होकर संभल कर चलना था और उसे किसी के सहारे से संभल कर फिर से खड़ा होना था
सच में , आँखों में आंसू मेरे भी थे और आँखों में आंसू उसके भी थे
फर्क सिर्फ ये था ,मुझे चोट लगी थी पत्थर से वो पत्थर दिल से चोटिल था

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  1. Anshul Anshul 06/11/2015